
Sadh
HindiClassicalbhajan
देहापत्यकलत्रादिषु आत्मसैन्येषु असत्ष्वपि । तेषां प्रमत्तो निधनं पश्यन्नपि न पश्यति ।। तन, सुत, दारा, धन सभी, समझे अपनी फौज । जग को मिटते देखता, फिर भी करता मौज॥ साधुसंग साधुसंग सर्वशास्त्र कय । लवमात्र साधुसंग सर्वसिद्धि हय ।। साधु-संग, साधु-संग, है शास्त्रो का सार। पल भर में कर दे सफल, जीवन का उद्धार॥