दादी, अब बस
दादी, अब बस
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[Verse 1]
घर में कदम रखूं
चेहरा तेरा ग़ुस्सा
हर बात पे डांट
जिंदगी पे ताला जैसा

मेरे सपने तुझे
अजीब से लगते
मैं उड़ना चाहता
तू पाँव में पत्थर धर के रख दे

मैं देर से लौटा
तो तेरा भाषण शुरू
फोन पे हँसा क्या
फिर मेरा क़सूर
हर वक़्त तेरा डर
जैसे सिर पे ताला
ये कैसा प्यार है
जिसमें घुटता हर सवाल

[Chorus]
दादी, अब बस
मुझे भी तो साँस लेने दे
दादी, अब बस
मेरा भी कल लिखने दे
तेरी दुनिया अलग
मेरी राह क्यों तोड़ती है
दादी, अब बस
मुझे अपना आप होने दे (होने दे)

[Verse 2]
कहती है “ये मत कर”
कहती है “वो मत कर”
मैं कोई खिलौना नहीं
जो रख दे कोने पर

तेरे ज़माने की थकान
मेरे कंधे पे क्यों
तू जो हार गई थी
मैं क्यों हार मान लूँ

मैं तेरी इज़्ज़त करूँगा
पर खुद से गद्दारी नहीं
तेरी हर बंद खिड़की
मेरी बग़ावत सही

मैं भी इंसान हूँ
सिर्फ़ पोता कोई रोल नहीं
मुझे जीने दे
या फिर बोल सही-सही

[Chorus]
दादी, अब बस
मुझे भी तो साँस लेने दे
दादी, अब बस
मेरा भी कल लिखने दे
तेरी दुनिया अलग
मेरी राह क्यों तोड़ती है
दादी, अब बस
मुझे अपना आप होने दे (ओह-ओह)

[Bridge]
तुझसे नफ़रत नहीं
तेरे साये से डर लगता
तू दुआ कर, दुआ
कि मैं अपना रास्ता चुन सकूँ
तू छोड़ दे पकड़
वरना मैं ही छोड़ दूँ घर
दूरी ही सही, मगर
जिंदा रहूं अपने अंदर

[Chorus]
दादी, अब बस
मुझे भी तो साँस लेने दे
दादी, अब बस
मेरा भी कल लिखने दे
तेरी दुनिया अलग
मेरी राह क्यों तोड़ती है
दादी, अब बस
मुझे अपना आप होने दे (होने दे, होने दे)