रात के साये में तू
रात के साये में तू
90sBollywoodromantic-thrillervibe;malevocalswithvelvetytoneandslighttrembleonheldnotes.Sparseflutephrasesandwarmnylon-stringguitararpeggiosoversoftrainandwindambience,withgentledholakanddholkigroovethatswellsintoadanceableliltonthehook.Stringsentersubtlyinthechorustowidentheharmony,tremolopadsforsuspense.Dynamicsriseonrhythmsectionsthenpullbacktointimate,breathypassages;spaceyreversesandlowchoirpadshintatdangerundertheromance.
[Intro]
[हल्की बांसुरी
दूर से डोली की थाप
बारिश की बूँदें]
रात है गहरी
पत्तों में सरगोशियाँ
साँस रुकी सी
तेरी तरफ़ ये रौशनीयाँ
कदमों के पीछे कोई परछाईं चलती जाए
तू पास खड़ी है
फिर भी दूरी सताए

[Verse 1]
जंगल की राहों पे
तेरा आँचल भीगे
दिल सिमट जाए
काँपती शाखों से
तेरा नाम गिरके ज़मीन तक आए
तू हँसे हल्का सा
जैसे दिल पे नोक किसी तलवार की
हाथ पकड़ लूँ क्या
या छोड़ दूँ तुझे इन दीवारों की (छाँव में)

[Chorus]
रात के साये में तू
मैं हूँ तेरे साथ
डर भी है
प्यार भी है
धड़कन की बारात
पत्तों की सरसर में तू
कानों में इकरार
कदम-कदम पे लगे
होगा अब कुछ ख़ास (ओ-ओ)
रात के साये में तू
आँखों का राज़
होंठों पे अधूरा सा
रुक-रुक के आग़ाज़

[Verse 2]
दूर कहीं पेड़ के पीछे
झिलमिल आँखें जैसे कोई देखता हो
तेरी कलाई पकड़ के
मैं तुझे घुमाऊँ
धरती रुकती लगती हो
घुँघरू से पायल बोले
साया टेढ़ा-मेढ़ा संग नाच जाए
तेरी पलकों के नीचे
एक रहस्य छुपा है
जो मुझको बुलाए (अरे)

[Chorus]
रात के साये में तू
मैं हूँ तेरे साथ
डर भी है
प्यार भी है
धड़कन की बारात
हवा की सरसर में तू
कानों में इकरार
कदम-कदम पे लगे
होगा अब कुछ ख़ास
रात के साये में तू
साँसों का राज़
होंठों पे अधूरा सा
रुक-रुक के आग़ाज़ (ओ जाना)

[Bridge]
[डोलक की थाप तेज़
गिटार पर हल्का रिफ़
बांसुरी ऊँची होती हुई]
एक पल को तू रुक जा
सुन ले ये दिल की गिरती आवाज़ें
कहीं से कोई पुकारे
नाम हमारा टूटी सी साज़ें
तू मेरी बाँहों में छुप जा
दुनिया से
डर से
इन फ़ासलों से
अगर ये सपना भी हो तो
जागूँ न तेरे इन क़दमों से (ओ-ओ)

[Chorus]
रात के साये में तू
मैं हूँ तेरे साथ
डर भी है
प्यार भी है
धड़कन की बारात
पत्तों की सरसर में तू
कानों में इकरार
कदम-कदम पे लगे
होगा अब कुछ ख़ास
रात के साये में तू
आँखों का राज़
होंठों पे अधूरा सा
रुक-रुक के आग़ाज़

[Outro]
[धुन धीमी
सिर्फ़ बांसुरी और बारिश]
रात है गहरी
पर तेरा हाथ मेरे हाथों में
डर भी है मीठा
तेरी बाहों की इन रातों में